कुलहिन्द मुशायरे में नामचीन शायरों ने सुनाई अपनी रचनाएं

            महोत्सव की आखिरी शाम में देश के नामचीन शायरों ने शिरकत की और अपनी शायरियों से लोगों को ख्ूाब आनन्दित किया। जिगर और असगर का याद में आयोजित हुए मुशायरे में सबा बलरामपुरी बलरामपुर,जनाब जौहर कानपुरी कानपुर, जनाब अशोक साहिल दिल्ली, हाशिम फिरोजाबादी फिरोजाबाद, जनाब वसीम रामपुरी रामपुर, काबिश रुदौलवी फैजाबाद, श्रीमती शबीना अदीब कानपुर, रुखसार बलरामपुरी लखनऊ, अली बाराबंकवी बाराबंकी, विकास बौखल बाराबंकी, जनाब पीके धुत्त एटा, जनाब नदीम फर्रूख ने शिरकत की। मुशायरे का संचालन नदीम फर्रूख ने किया। विकास बौखल ने जीएसटी व पुलिस से सम्बन्धित हास्य शायरी प्रस्तुत की तो शब बलरामपुरी ने जो फूल तुमने भेजे थे खत के जवाब में अब भी महक रहे हें मेरी किताब में, नजमी कमाल द्वारा साजिश है सबकी हमको मिटाने के वास्ते, हम जी रहे हैं सबको बचाने के वास्ते सुनाया तो रूखसाार ने बलरमपुरी ने हमारे पुरखों की ये अन बेंच डालेगें, कलाम गांधी की ये शान बेंच डालेगें शायर कासिम अब्बास द्वारा हम लोग बस ऐसे ही इन्सान से मिलते दुनिया में, वसीम रामपुरी ने चुनेगें फूल सारे कांटे जितने हें मसल देगें, वतन की जमीं पर हम वफा का इतर मल देगें सुनाया तो लोगों ने खाूब तलियां बजाईं। पीके धुत ने हास्य वरूंग की रचनाएं पड़ी तो लोगों ने खूब आनन्द लिया। जौहर कानपुरी ने अंगारों को फूल बनाया जाएगा, नदीम फर्रूख ने इस तरह तेरे इश्क में फना हो जाऊं,  हवा बनाऊं तुझे और मैं दिया हो जाऊं सुनाया। मुशायरे में  याकूब अज्म गेण्डावी, शबीना अदीब व अन्य शायरों ने अपनी रचनाएं पढ़ी।

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